February 27, 2020

गोबर धन योजना 2020| Gobar Dhan Scheme In Hindi

गोबर धन योजना 2020 – मित्रों 19 वीं पशुधन जनगणना २०१२ के अनुसार हमारे देश में मवेशियों की जनसँख्या करीब ३० करोड़ है जिससे लगभग प्रतिदिन ३० लाख टन गोबर की प्राप्ति होती है ग्रामीण क्षेत्रों में इसका सुनुयोजित उपयोग नहीं होता है जिससे यह स्वच्छ भारत मिशन में भी एक बाधा की तरह देखा जाता है अगर हम पशुधन का उपयोग सही ढंग से करे तो यह हमारी अतरिक्त आय का अच्छा स्रोत भी है तथा कृषि के लिए जैविक खाद तथा बायो गैस भी एक बेहतर विकल्प है यूरोपीय देशों और चीन द्वारा ऊर्जा उत्पादन के लिये पशुओं के गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग किया जाता है। लेकिन भारत ऐसे अपशिष्ट पदार्थो से आर्थिक लाभ लेने में लगभग असफल रहा है तो क्यों न हम भी बेकार समझे जाने वाले गोबर से लाभ प्राप्त करें और देश की अर्थव्यवस्था में योगदन करें तो आईये जानतें हैं हम ऐसी ही एक योजना गोबर धन योजना (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan – GOBAR DHAN SCHEME) के बारे में…

गोबर धन योजना 2020| Gobar Dhan Scheme In Hindi

इस योजना को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के हिस्से के रूप में कार्यान्वित किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में स्वच्छ गाँव बनाने के लिए दो मुख्य अंग हैं – खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) गाँव बनाना तथा  ग्रामीण क्षेत्रों  में ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन करना।

गोबर-धन योजना /Gobar Dhan Yojana का पूरा नाम गैलवनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्स धन है|

गोबर धन योजना (गैल्वनाइज़िंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज़-धन) की शुरुआत 01 मई 2018 को करनाल हरियाणा के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान से केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा की गई थी इस योजना के तहत हरियाणा करनाल के ग्राम कुंजपुरा में पहला संयत्र लगाया गया है. इस संयंत्र की स्थापना से गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पदार्थों को कम्पोस्ट, बायो-गैस और बायो-सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा। 

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण ईलाको में स्वच्छता को सकारात्मक रूप से बढ़ावा देना तथा मवेशियों से प्राप्त  पशुधन , जैविक कचरे से धन और ऊर्जा उत्पन्न करना एवं नए ग्रामीण आजीविका के अवसरों का सृजन करना किसानों और अन्य ग्रामीण पशुपालकों के आयों में बढ़ोत्तरी करना है।

इस योजना में ग्राम पंचायत की एक महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसके तहत पशुधन से जैव-गैस संयंत्र व्यक्तिगत या सामुदायिक स्तर पर स्थापित किए जा सकते हैं गौशालाओं जैसे स्वयं सहायता समूहों और गैर-सरकारी संगठनों के स्तर पर भी, इसकी स्थापना की जा सकेगी  प्लांट की स्थापना के लिए विशेषज्ञों की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी  योजना के तहत केंद्र सरकार 60 प्रतिशत तथा राज्य सरकार 40 प्रतिशत धनराशि, प्रदान करेगी जो की गांवों में कुल घरों की संख्या पर निर्भर करेगी

2018-19 में गोबर धन योजना को प्रारंभिक आधार पर 350 तथा बाद में 700 जिलों में लागू किया गया है

गोबर धन योजना करे लाभ :

  • भारत विश्व के सबसे बड़ी पशु जनसँख्या वाला देश होने के कारण गोबर की बड़ी मात्रा को उर्जा, जैविक खाद तथा गोबर धन में बदलकर इसका लाभ उठाने की क्षमता रखता है। 
  • किसान के लिए गोबर बिक्री आय का एक अतरिक्त महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरेगा तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के एक अध्ययन २०१४ के अनुसार  गोबर का बड़े पैमाने पर उत्पादकता तथा उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर १५ लाख नए रोजगारों का सृजन कर सकता है। 
  • इससे किसानों खासकर युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे !
  • गोबर धन योजना से मवेशियों का गोबर तथा ऐसे ही अन्य अपशिष्ट पदार्थों से खाद, बायो गैस और बड़े पैमाने पर बायो CNG इकाई बनाने की अपार संभावना है। 
  • स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण इस योजना का मार्गदर्शन करने में सक्षम है।

गोबर धन योजना को सुचारू रूप से व्यवस्थित संचालन करने के लिए एक ऑनलाइन व्यपार मंच (Trading Platform) की शुरुआत की जाएगी जो किसानों को खरीदारों से जोड़ेगा ताकि किसानों को गोबर और कृषि अपशिष्ट (Agriculture Waste) का सही कीमत मिल सके।

बायो-गैस, जैव-ईंधन का सबसे सामान्य रूप है, ऊर्जा का एक स्वच्छ रूप है और इसे गोबर, मुर्गी पालन, फसल अवशेष, रसोई अपशिष्ट, आदि से प्राप्त किया जा सकता है। विशेष रूप से गोबर-धन से ग्रामीण सामान्य लोगों और महिलाओं को लाभ तथा इस स्वच्छ ईंधन से स्वास्थ्य और गांवों में सफाई में भी सुधार होगा।यह पहल जैव अपशिष्ट कचरे की वसूली और संसाधनों में कचरे के रूपांतरण का कार्य करेगी यह किसानों और उनके परिवारों को संसाधन और लाभ प्रदान करेगा और स्वच्छ गाँव बनाने के लक्ष्य को भी पूरा करने में सहायत करेगा जो स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का उद्देश्य है।

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