प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना| Krishi Sinchayee Yojana (PMKSY) 2020 In Hindi, Notification, Apply Online Form PDF

कृषि सिंचाई योजना| कृषि सिंचाई योजना प्रधानमंत्री|(पीएमकेएसवाई)|(PMKSY)|Prime Minister Krishi Sinchayee Yojana 2020

नमस्ते मित्रों जैसा की हम जानते है हमारे प्यारे भारतवर्ष में विभिन्न प्रकार के ऋतुये हैं इन्ही ऋतुओं पर हमारा फसल चक्र चलता है लेकिन पर्यावरण में परिवर्तन के कारण जलवायु का समय पर न आना भी एक गंभीर समस्या है वर्षा न होने के कारण हमारे देश के कई प्रदेशों में सुखा पड़ जाता है तथा फसलों को भारी क्षति पहुचती है और किसनों को बड़े पैमाने पर नुकसान होता है इन्ही समस्याओं से निपटने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री कृषक सिंचाई योजना (PMKSY) की शुरुआत 1 जुलाई 2015 को की थी वर्तमान अनुमानों के अनुसार, भारत में 142 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में से केवल 45 प्रतिशत में ही कृत्रिम सिंचाई की कोई व्यवस्था है।

PM Krishi Sinchai Yojana
PM Krishi Sinchai Yojana

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना PMKSY (हर खेत को पानी)

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य स्रोत निर्माण, वितरण, प्रबंधन, तथा इसका खेतों में उपयोग और विस्तार की गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इस योजना के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की बजट राशि 5 वर्षो के लिए सरकार द्वारा निर्धारित की गई थी और सिंचाई के लिए आम बजट 2018-19 में 9429 करोड़ रूपये आवंटित किये गए जो कि पिछले वर्ष के अनुपात में 27.5 प्रतिशत अधिक है। 

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प (MOWR, RD & GR) मंत्रालय, भूमि संसाधन विभाग (DOLR) के एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम (IWMP) और कृषि जल प्रबंधन (OFWM) के त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) कृषि और सहकारिता विभाग (DAC) के संयुक्त साझेदारी के अंतर्गत किया जा रहा है योजना के उद्देश्य के उपलिब्ध के लिए मुख्य रूप से मृदा एवं जलसंरण हेतु छोटे, जल संचयन संरचना के साथ-साथ छोटे बांध तथा सम्मोच्च मेढ निर्माण आदि क्रियान्वयन कार्य राज्य सरकार के माध्यम से समेकित पनधारा प्रबंधन के तहत किया जाएगा करेगा। जिसके लिए वर्ष २०१५-२०१६ में १५०० करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे। 

हर खेत को पानी :

जलवायु पर कृषि की निर्भरता कम करने में इस योजना का बहुत बड़ा योगदान है कई दशकों के प्रयास के बाद भी हमारे देश का कृषि योग्य भूमि का अधिकांश भाग वर्षा पर आधारित है अनावृष्टि यानि वर्षा के कारण किसानों को विषम परिस्तिथियो का सामना करना पड़ता है इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री कृषक सिंचाई योजना की रुपरेखा तैयार की गई है जिसके तहत  उपजिला / जिला स्तर तथा राज्य स्तर पर सिंचाई की रुपरेखा तैयार  कर हर खेत तक जल पहुँचाना है निश्चित सिंचाई की प्रणाली ड्रिप एवं स्प्रिंकल कायर्क्रम को अपनाकर सिंचाई की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। 

प्रधानमंत्री कृषक सिचाई योजना के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई में पानी की कमी से कृषि में होने वाले क्षति से किसानों को बचाना है
  • जल सिंचन ,जल संचय, जल संरक्षण
  • प्रति बूँद अधिक उपज (More Crop Per Drop)
  • इस योजना में केंद्र सरकार 75 प्रतिशत तथा राज्य सरकार 25 प्रतिशत का अनुदान देगी
  • पृवोर्त्तर राज्यो और पहाड़ी क्षेत्रो में केंद्र सरकार का अनुदान 90  राज्य सरकार का अनुदान 10 प्रतिशत होगा।
  • खेतों में जल का सही तरीके से उपयोग को बढ़ावा देना तथा जल के अपव्यय को काम करना है
  • जलवायु की स्थिति तथा जल की उपलब्धता के आधार पर जिला और राज्य स्तरीय योजनाए बनाना
  • सिंचाई जल के उपलब्धता के अनुसार फ़सलो का चयन तथा सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग जैसे शुक्ष्म सिंचाई प्रणाली टपकन सिंचाई विधि तथा छिड़काव विधि को काम में लाना है

सिंचाई में नई तकनीक का उपयोग :

ड्रिप या टपकन सिंचाई विधि : 

इस विधि द्वारा सिंचाई करने से साधारण विधि से तीन गुणा ज्यादा करीब 60 से 70 प्रतिशत पानी की  बचत होती है इस विधि का प्रयोग सभी तरह के फसलों के लिए कर सकते हैं यह विशेषकर बागवानी वाले फसलों जैसे केला, पपीता, निबूं के बहुत ही कारगर है ड्रिप सिंचाई  विधि में जड़ को छोड़कर सभी भाग सूखा रहता है, जिससे खरपतवार नहीं उगते हैं, और निराई-गुड़ाई का खर्च भी बच जाता है।

फव्वारा /छिड़काव सिंचाई विधि :  

छिड़काव विधि से सिंचाई छिड़काव के रूप में किया जाता है, जिससे पानी पौधों पर वर्षा की बूंदों की तरह पड़ता है। पानी की बचत और उत्पादकता के हिसाब से यह विधि ज्यादा उपयोगी है। दलहनी फसलों जैसे मटर चना, सरसों, मसूर इत्यादि के लिए ये विधि उपयोगी मानी जाती है।  सिंचाई के दौरान ही उर्वरक, तथा कीटनाशक दवा पानी में मिला दी जाती है, जो पौधे की जड़ो में चली जाती है। इस विधि से सिंचाई करने पर मिट्टी में नमी बनी रहती है और सभी पौधों को एक समान पानी मिलता रहता है ऐसा करने पर पानी की बर्बादी नहीं होती। जिस जगह पर खेत ऊंचे-नीचे होते हैं वहां पर इस विधि का प्रयोग कर सिंचाई बहुत ही आसानी से कर सकते हैं। 

टपक व फव्वारा सिंचाई के लिए लघु एवं सीमांत किसान को 90 फीसदी अनुदान सरकार की तरफ से दिया जाता है। दस फीसदी धनराशि किसानों को लगानी होती है। सामान्य किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। 25 प्रतिशत किसानों को अपनी पूंजी लगानी होती है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का अनुदान प्राप्त करने की पात्रता : 

  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ हर वर्ग के किसानों को मिल सकता है इस योजना का लाभ लेने के लिए स्वयं की भूमि सहित जल स्रोत भी उपलब्ध होना चाहिए  
  • वे संस्थान और लाभार्थी भी इस योजना के लाभ के पात्र हैं जो कम से कम सात वर्षों से लीज़ अग्रीमेंट के तहत उस भूमि पर खेती कर रहें हैं
  • योजना का लाभ लेने के लिए जरुरी दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, भूमि पहचान पत्र (खाता खेसरा) तथा बैंक में खाता इत्यादि होना आवश्यक है
  • इस योजना के तहत ड्रिप या टपकन सिंचाई, मिनी स्प्रिंकल, माइक्रो स्प्रिंकल, और स्प्रन्कलर सिंचाई मशीनों के लिए सरकार द्वारा अनुदान प्रदान की जाती है। 
  • प्रधानमंत्री कृषक कल्याण योजना का अनुदान प्राप्त करने की योग्यता की जानकारी आप अपने सम्बंधित राज्य के कृषि मंत्रालय के वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं क्योकि इसकी योग्यता  सम्बंधित राज्य के मानदंडो पर तय की जाती है।
  • प्रधानमंत्री कृषक सिंचाई योजना से जुडी अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप pmksy.gov.in पर जा सकते हैं

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