New National Education Policy 2020: नई शिक्षा नीति से भारत की शिक्षा प्रणाली में होने जा रहे हैं ये 10 बड़े बदलाव – बच्चे और अभिभावक जरूर पढ़ें

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New National Education Policy 2020: मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन के द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मिली मंजूरी। शिक्षकों को सम्मानित करने और नई शिक्षा नीति 2020 (New Education Policy) को आगे बढ़ाने के लिए 8 सितंबर से 25 सितंबर, 2020 तक शिक्षा पर्व मनाया जा रहा है। नई शिक्षा नीति से भारत की शिक्षा प्रणाली में होने जा रहे हैं ये 10 बड़े बदलाव, बच्चे और अभिभावक जरूर पढ़ें।

New National Education Policy 2020 In Hindi
New National Education Policy 2020: नई शिक्षा नीति से भारत की शिक्षा प्रणाली में होने जा रहे हैं ये 10 बड़े बदलाव – बच्चे और अभिभावक जरूर पढ़ें

मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कुछ समय पहले ही शिक्षा निति में बदलाव करते हुए 2020 के लिए नई शिक्षा नीति लागु की गयी थी जिसमे कई सारे बदलाव किये गए थे जिसको आज प्रभावी रूप से लागु कर दिया गया है मतलब आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की मीटिंग में नेशनल एजुकेशन पालिसी 2020 को मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन के द्वारा मंजूरी दे दी गयी है। आज वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से देश को संबोधन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा नई शिक्षा नीति पर मोहर लगा दी गयी है जिसमे देश के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, देश के शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक , नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्माता डॉ कृष्णास्वामी कस्तूरीरांगन, सभी राज्य के शिक्षा मंत्री समेत कई लोग सम्मिलित हुए थे। इससे पहले ये राष्ट्रीय शिक्षा नीति आज से 34 साल पहले 1986 में बनाई गयी थी।

आर्टिकल विषयनेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020
किस ने लांच की स्कीमभारत सरकार
लाभार्थीभारत के नागरिक
आर्टिकल का उद्देश्यइस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य शिक्षा का सार्वभौमीकरण करना है तथा भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है।
ऑफिशियल वेबसाइटयहां क्लिक करें
साल2020
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Contents

नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी क्या है?

नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के अंतर्गत केंद्र सरकार के द्वारा स्कूली शिक्षा व कॉलेज शिक्षा में बदलाव किया गया है जो बीजेपी के चुनावी घोषणा पत्र 2014 में शामिल थी जिसे 7 सितंबर 2020 को केबिनेट की मीटिंग में मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन के द्वारा मंजूरी दे गयी है। हालाँकि इससे पहले इस डिपार्टमेंट का नाम ह्यूमन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट था इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत 2035 तक उच्च शिक्षा में 50% एनरोलमेंट लक्ष्य रखा गया है इसके अलावा दुनियाभर की बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटीज हमारे देश में अपना कैंपस लगा सकेगी जिससे देश के छात्र छात्राओं को फायदा ये होगा की उनको उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अन्य देश में जाकर पढ़ाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इससे पहले 34 साल पहले 1986 में शिक्षा नीति बनाई गयी थी जिसमे तीन दशकों से किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं गया था लेकिन 1990 और 1993 के बीच नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की समीक्षा करने के लिए कई कमेटियां जरूर बनाई गयी थी ।

New National Education Policy 2020 Latest Update

इस नई शिक्षा नीति का निर्माण इसरो प्रमुख डॉ कृष्णास्वामी कस्तूरीरांगन के द्वारा किया गया है इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत  देश को वैश्विक ज्ञान में महाशक्ति बनाना है जिसमे शिक्षा का सार्वभौमीकरण किया गया है। इस नई शिक्षा नीति के अंतर्गत क्षेत्रीय भाषा को बढ़ावा देने के लिए पांचवी तक की पढ़ाई क्षेत्रीय भाषा/मातृ भाषा में ही करवाई जाएगी हालांकि ये आठवी या इससे उपर की कक्षा के छात्र छात्राओ के लिए भी लागु हो सकता है। इसके साथ ही सभी स्तरों पर सभी भाषा की जननी संस्कृत भाषा को भी प्रस्तावित किया गया है इसके अलावा सेकंडरी स्कूल लेवल के छात्र छात्राओं के लिए कई प्रकार की  विदेशी भाषाएं भी प्रस्तावित गयी है इसमें एक बात हम पहले ही स्पष्ट कर देते है की किसी भी प्रकार की भाषा किसी भी छात्र छात्राओं पर थोपी नही जाएगी बच्चे अपनी इच्छानुसार भाषा का चुनाव कर सकते है क्योंकी जब नयी शिक्षा नीति की घोषणा की गयी थी तब दक्षिण के राज्यों ने भाषा से सबंधित विरोध दर्ज करवाया था जिसको देखते हुए उन्होंने नई शिक्षा नीति को अपने राज्य में लागु करने से मना कर दिया था लेकिन अब उनकी जो मांगे थी वो मान ली गयी है और अब पुरे देश भर में नई शिक्षा नीति लागु कर दी गयी है ।

  • पहले की शिक्षा नीति में 10+2 का पैटर्न पर लागू की गयी थी लेकिन अब की नई शिक्षा नीति करिकुलम 5+3+3+4 पैटर्न पर आधारित है जिसके अंतर्गत 3 से 6 साल के बच्चो का फाउंडेशन लिटरेसी बढ़ाने के लिए एक ही तरीके की पढ़ाई करवाई जाएगी।
  • और छोटे बच्चे के लिए जो कक्षा पहली से तीसरी में है उनके लिए नेशनल मिशन शुरू किया जायेगा ताकि बच्चो को बुनियादी शिक्षा का ज्ञान दिया जा सके या समझ सके ।
  • मिडिल स्कूल में आने पर मतलब कक्षा 6 से 8 वी में आने पर बच्चो को सभी सब्जेक्ट का ज्ञान करवाया जायेगा मतलब उनको इंट्रोडक्शन कराया जायेगा इसके साथ ही बच्चो को कक्षा 6 वी से कोडिंग सिखाई जाएगी।
  • मिडिल स्कूल में आने पर मतलब कक्षा 6 से 8 वी में आने पर बच्चो को सभी सब्जेक्ट का ज्ञान करवाया जायेगा मतलब उनको इंट्रोडक्शन कराया जायेगा इसके साथ ही बच्चो को कक्षा 6 वी से कोडिंग सिखाई जाएगी।

नई शिक्षा नीति के तहत अगर कोई बच्चा नौकरी के क्षेत्र में जाना चाहता है उन छात्र छात्राओं के लिए तीन साल का डिग्री कोर्स होगा इसके अलावा जो बच्चे किसी प्रकार की रीसर्च करना चाहते है मतलब शोध करना चाहते है उन छात्र छात्राओ के लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम लागू किया गया है इसके लिए किसी भी छात्र को एमफिल करने के जरूरत नहीं होगी वो छात्र छात्राये एक साल की एमए के बाद सीधा चार साल के शोध डिग्री प्रोग्राम में अपना एडमिशन ले सकते है ।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से शिक्षा को मिलेगी नयी दिशा

किसी भी देश को विकसित बनाने में उसकी शिक्षा नीति का बहुत बड़ा योगदान होता है जिसके कारण विश्व भर के देश अपनी शिक्षा पर अपनी जीडीपी का 5% से लेकर 10% तक खर्च करते है ताकि बच्चो को अच्छी शिक्षा व ज्ञान मिल सके और आवश्यकता अनुसार बदलाव हो सके इसी को देखते हुए मोदी सरकार के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है जिसमे शिक्षा के स्तर में भी कई तरह के बदलाव किये गया है। नई शिक्षा नीति 2020 को लागु करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को सबोंधन करते हुए बताया की हालही में लागु की गयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नए भारत का आधार बनेगी और अपने देश के छात्र-छात्राओं को अपनी सभ्यता से भी जोड़ी रखेगी व देश के छात्र छात्राओं को ग्लोबल सिटीजन बनाएगी जिससे देश का नाम रोशन होगा।

इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अंतर्गत अपने किसी एक पैशन को फॉलो करने, होर्डे मेंटालिटी, क्रिटिकल थिंकिंग को डिवेलप करने, इंटरेस्ट, एबिलिटी, टीचर्स ट्रेनिंग, क्षेत्रीय भाषा को बढ़ावा देने के आधार पर नई शिक्षा नीति को लागु किया गया है जो हाउ टो थिंक पर आधारित है इससे पहले जो शिक्षा नीति लागु की गयी थी जो व्हाट ऊ थिंक पर आधारित थी ।

शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा में होगा बदलाव

इस नई शिक्षा नीति में शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गए है ताकि शिक्षकों का द्वारा पढ़ाया गया बच्चो को आसानी से समझ आ सके जिससे बच्चो का ज्ञान बढ़ेगा ।

  • इसी को देखते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में बदलाव किया गया है जिसके अंतर्गत शिक्षक पात्रता परीक्षा अब चार भागो में विभाजित की गयी है जैसे – फाउंडेशन, प्रीपेरेटरी, मिडल व सेकेंडरी इससे पहले टीईटी परीक्षा दो भागो में विभाजित की जाती थी ।
  • शिक्षक पात्रता परीक्षा में अब इसी के आधार पर पैटर्न तैयार किया जायेगा जिसमे शिक्षक के सबंधित विषय का एनटीए टेस्ट स्कोर भी चेक कर सकते है ।
  • शिक्षक पात्रता परीक्षा में अब इसी के आधार पर पैटर्न तैयार किया जायेगा जिसमे शिक्षक के सबंधित विषय का एनटीए टेस्ट स्कोर भी चेक कर सकते है ।

National Education Policy का उद्देश्य –

इस नयी शिक्षा नीति के द्वारा मोदी सरकार भारत की शिक्षा को वैश्विक स्तर लाना चाहती है जिससे देश की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार होगा  तो देश का मान भी बढ़ेगा और अन्य देशो की बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटी हमारे देश में अपना कैम्प्स लगा सकेगी जिससे फायदा ये होगा की जो छात्र छात्राये अन्य देशो में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते थे उनको अब दुसरो देशो में जाकर पढ़ने की जरूरत नहीं होगी इसके अलावा गरीब परिवार का बच्चे भी इन यूनिवर्सिटी के कैम्प्स में अपना एडमिशन ले सकेंगे क्योंकि अन्य देश में जाकर पढ़ाई करना बहुत ही महँगा होता है जो हर किसी छात्र के बस की बात नहीं होती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की विशेषताएं

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्नातक तीन साल की तरह ही होगी लेकिन इसमें कई एग्जिट ऑप्शन दिए गए है मतलब कोई छात्र किसी कारणवंश बीच में ही पढ़ाई छोड़ देता है तो उसको अलग से सर्टिफिकेट दिया जायेगा। उसके बाद अगर कोई आगे स्नातकोत्तर करना चाहते है तो वो भी कर सकता है जो एक साल की होगी इससे पहले स्नातकोत्तर दो साल की होती थी ।

और जो छात्र किसी भी प्रकार का कोई शोध करना चाहते है या रिसर्च करना चाहते है तो उनके लिए नई शिक्षा नीति के अंतर्गत चार साल का एक अलग से डिग्री प्रोग्राम होगा।

पाठ्य पुस्तकों पर निर्भरता कम करके ईलर्निंग पर अधिक जोर दिया जायेगा ।

उच्च शिक्षा संस्थानों में अपना प्रवेश लेने के लिए जो परीक्षा ली जाती है उनको सामान्य किया जायेगा ।

इस नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत 2030 हर जिले में बड़ी बहु विषयक उच्च शिक्षा संस्थान का निर्माण करवाया जायेगा ।

इस शिक्षा नीति में दिव्यांग जनों के लिए अलग से शिक्षा में बदलाव किया गया है बाकि सरकारी व प्राइवेट कॉलेज और स्कूल शिक्षा समान होगी ।

छात्र छात्राओं को पढ़ाई के आधार पर क्रेडिट जमा करने के लिए एकेडमिक क्रेडिट बैंक का निर्माण किया जायेगा जिसके अंतर्गत कॉलेज व यूनिवर्सिटी के छात्र अपना खाता खुलवा सकते है जिसमे छात्र की पढ़ाई के आधार पर उसके बैंक खाते में एकेडमिक क्रेडिट बैंक के द्वारा क्रेडिट जमा किया जायेगा साधारण भाषा में कहे तो अगर कोई छात्र छात्राये अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देते है तो उसकी पढ़ाई का क्रेडिट उसके खाते में जमा कर दिया जायेगा जब भी वो वापिस पढ़ाई फिर से शुरू करेगा तो उसका पूरा रिकॉर्ड उसमे मौजूद रहेगा उसके हिसाब से वो आगे से पढ़ाई फिर से शुरू कर सकेगा ।

इस एजुकेशन पॉलिसी के तहत केंद्र सरकार के भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के पास चार ही वर्टिकल होंगे :-

  • 1. नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी काउंसिल
  • 2. जनरल एजुकेशन काउंसिल
  • 3. हायर एजुकेशन काउंसिल
  • 4. नेशनल एक्रीडिटेशन काउंसिल

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को चार चरण में विभाजित किया गया है:-

पहले की शिक्षा नीति 10+2 का पैटर्न  पर लागू की गयी थी जो दो भागो में विभाजित की गयी थी लेकिन नई शिक्षा नीति में बदलाव करते हुए 5+3+3+4 का पैटर्न पर लागू की गयी है जिसको चार भागो में विभाजित किया गया है जिसमे 3 साल की प्री स्कूली शिक्षा व 12 साल की स्कूली शिक्षा प्रदान की जाएगी जो देश भर के सभी सरकार व प्राइवेट स्कूल व कॉलेज में लागू रहेगी।

  1. फाउंडेशन स्टेज: – ये सबसे नीचे की स्टेज है जिसमे सबसे पहले बच्चो को तीन साल की प्री स्कूल शिक्षा दी जाएगी उसके बाद दो साल की स्कूली शिक्षा दी जाएगी ये स्टेज तीन साल से आठ साल के बच्चो को उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि बच्चे बुनियादी शिक्षा अच्छी तरह से समझ सके उसके लिए नेशनल मिशन भी शुरू किया जायेगा।

2. प्रिप्रेटरी स्टेज – इस स्टेज में कक्षा तीन से पांचवी तक के बच्चे होंगे जिनकी उम्र 8 वर्ष से लेकर 11 वर्ष होगी इस स्टेज के अंतर्गत बच्चो को उनकी क्षेत्रए भाषा में पढ़ाई करवाई जाएगी जिसमे बच्चो का संख्यात्मक कौशल का विकास करना है।  

3. मिडिल स्टेज – इस स्टेज में कक्षा 6 वी से 8 वी तक के बच्चे आएंगे जिसमे बच्चो को कोडिंग सिखाई जाएगी इसके साथ साथ व्यवसायिक परीक्षण भी दिया जायेगा जिसमे बच्चे अपनी इच्छा के अनुसार सेलेक्ट कर सकते है ।

4. सेकेंडरी स्टेज – इस स्टेज के अंतर्गत कक्षा 9 से 12  के बच्चे आएंगे जिसमे वो अपनी पसंद के हिसाब से किसी भी सब्जेक्ट को सेलेक्ट करके चुनाव कर सकते है मतलब आर्ट्स ,कॉमर्स ,साइंस के किसी भी सब्जेक्ट का चुनाव कर सकते है इससे पहले आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस में से किसी एक स्ट्रीम का चुनाव करके फिर सब्जेक्ट करना होता था लेकिन अब छात्र कोई भी सब्जेक्ट के चुनाव कर सकते है चाहे वो किसी आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस  का भी हो इसके साथ ही बच्चे अपने पसंद की भाषा भी इसमें चुन सकते है जो बच्चो पर निर्भर होगा कोनसी भाषा का ज्ञान लेना चाहते है किसी भी बच्चे पर कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी ।

National Education Policy के लाभ:-

  • इस नई शिक्षा नीति के तहत जीडीपी का 6 फीसदी सिर्फ शिक्षा पर खर्च किया जायेगा इससे पहले केंद्र सरकार व राज्य सरकार के द्वारा मिलकर 4 फीसदी ही खर्च किया जाता था जो बहुत ही कम था।
  • इसमें भारत प्राचीन भाषाएँ व कई विदेशी भाषाएँ भी उपलब्ध करवाई जाएगी जिसमे बच्चे अपनी इच्छा अनुसार भाषा का चयन कर सकते है ।
  • नई शिक्षा नीति को देश भर में लागु करने के लिए कई संस्थान स्थापित किये जायेंगे।
  • बच्चो को पढ़ने व उनको अच्छी तरह से समझाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर का भी उपयोग किया जायेगा ।
  • इस नई शिक्षा नीति में  एमफिल की डिग्री को समाप्तकर दिया गया है अब बिना किसी एमफिल की डिग्री के भी रिसर्च कर सकते है ।
  • पहले बच्चो को तीन भाषाएँ सिखाई जाती थी लेकिन अब नई शिक्षा नीति के तहत बच्चो को तीन भाषाएँ सिखाई जाएगी जो राज्य सरकार पर निर्भर करता है ।
  • बच्चो को पढ़ाई करवाने के साथ साथ कौशल प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जायेगा ।
  • अगर कोई छात्र छात्राये किसी भी प्रकार का कोई कोर्स कर रहे है लेकिन वो बीच में छोड़ कर मतलब थोड़े समय के लिए बीच में ब्रेक लेते है तो और किसी अन्य कोर्स को ज्वाइन करना चाहते है तो वो भी कर सकते है ।

नई शिक्षा नीति 2020 स्ट्रीम्स:-

  • नई नेशनल पॉलिसी के अंतर्गत छात्रों को अब किसी एक स्ट्रीम को नहीं चुनना पड़ेगा इससे पहले तीन स्ट्रीम में किसी एक को चुनना पड़ता था जैसे – आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस उसके बाद उनको इनमे से तीन सब्जेक्ट्स का चुनाव करना होता था लेकिन अब ऐसा नहीं करना पड़ेगा इस नई शिक्षा नीति के अनुसार छात्र किसी भी स्ट्रीम का कोई सब्जेक्ट का चुनाव कर सकते है जैसे आर्ट्स के सब्जेक्ट्स के साथ साइंस या कॉमर्स के सब्जेक्ट का चुनाव कर सकते है और इसी तरह साइंस वाले भी कॉमर्स या आर्ट्स के सब्जेक्ट्स का चुनाव कर सकते है ।
  • इसके साथ ही बच्चो को योग, खेल, नृत्य, मूर्तिकला, संगीत भी सिखाया जायेगा ।
  • वोकेशनल तथा एकेडमिक स्ट्रीम को साथ में ही सम्मिलित किया गया है इसके अलावा साथ में शारीरिक शिक्षा से सबंधित भी पाठ्यक्रम जोड़ा गया है ।

नई शिक्षा निति के अंतर्गत B.Ed अब 4 साल की होगी:-

अभी B.Ed दो साल की होती थी लेकिन अब नई शिक्षा निति के अंतर्गत टीचर ट्रेनिंग में बदलाव करते हुए चार साल की कर दी गयी है इसलिए अब से कोई  भी B.Ed करेगा उसको चार का डिग्री प्रोग्राम करना होगा इसमें कई ऐसे बदलाव भी किये गए है जिससे टीचर की गुणवत्ता को बढ़ाया जायेगा जो शिक्षण संसथान इसका पालन नहीं करेगा उनके खिलाफ कानूनी करवाई भी की जाएगी।

वोकेशनल स्टडीज पर भी काफी फोकस रहेगा:-

एक सर्वे के मुताबिक वोकेशनल स्टडी सीखने वाले बच्चे देश भर में सिर्फ 5 % है इसलिए इस शिक्षा निति के अंतर्गत वोकेशनल स्टडी पर भी ध्यान दिया गया है जिसके अंतर्गत 2025 तक 50% से अधिक छात्र छात्राओं को वोकेशनल स्टडीज पढ़ाने के लिए लक्ष्य रखा गया है जिसके अंतर्गत लकड़ी का काम, बागबानी, मिट्टी के बर्तन के बारे में, बिजली का काम इस प्रकार की सभी कार्य के बारे में जानकारी दी जाएगी।

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत क्षेत्रीय भाषा पर बल दिया गया गया है:-

हमारे देश में कई भाषा बोली जाती है इसी को देखते हुए छोटे बच्चो को एक से पांचवी कक्षा तक की शिक्षा को उनकी क्षेत्रीय भाषा में ही करवाई जाएगी उसके लिए पाठ्यक्रम भी उनकी क्षेत्रीय भाषा में ही उपलब्ध करवाया जायेगा ताकि बच्चो को जो पढ़ाया जाये वो अच्छी तरह से समझ आ सके इसके अलावा अगर कोई पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषा में उपलब्ध नहीं होता है तो उन छात्रों को टीचर उनकी क्षेत्रीय भाषा में ही समजायेगा। इसके साथ ही बच्चो को एक से तीन भाषाओ का ज्ञान करवाया जायेगा ।

नये शिक्षकों की भर्ती करवाई जाएगी:-

नई शिक्षा नीति के तहत  कई भाषाओ को जोड़ा गया है जिसके अंतर्गत भाषाओ से सबंधित शिक्षा की कमी होती है तो उसको पूरा करने करने के लिए जल्द से जल्द भर्ती निकाल कर नई शिक्षकों की भर्ती की जाएगी इसके अलावा जरूरत पड़ने पर रिटायर टीचर्स को भी फिर से बुलाया जा सकता है।

वैश्विक तौर उभरने के लिए विदेशी भाषा का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है:-

इस नई शिक्षा नीति के तहत भारत को विश्व भर में वैश्विक तौर उभरना है इसके लिए विदेशी भाषाओ का भी ज्ञान होना बहुत ही जरूरी है इसलिए माध्यमिक विद्यालय में छात्र छात्राओं को विदेशी भाषा भी सिखाई जाएगी जैसे स्पेनिश, जर्मन, जैपनीज, चाइनीस, फ्रेंच। हालाँकि हम आपको यहाँ पर बता दे की किसी भी छात्रों पर कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी वो अपनी इच्छानुसार किसी भी भाषा का चुनाव कर सकते है।

नई शिक्षा नीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार:-

कई राज्यों सरकारों ने अपनी राजनीती मतभेद होने के कारण नई शिक्षा नीति लागु करने का विरोध कर रहे है इसलिए मोदी ने अपने संबोधन में कहा था की ये नई शिक्षा नीति देश की शिक्षा नीति है सरकार की शिक्षा नीति नहीं है इसलिए सभी राज्य सम्मान रूप से इसका पालन करे जैसे विदेश नीति और रक्षा नीति किसी सरकार की नीति न होकर देश की नीति होती है उसी तरह शिक्षा नीति भी देश की ही नीति है।

नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च किया जायेगा:-

भारत शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जीडीपी का बहुत ही कम भाग खर्च करता है जिसके कारण भारत दुनिया का 136वां देश है जो शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कम खर्च करता है  इसलिए नई शिक्षा नीति (National Education Policy) के तहत भारत सरकार के द्वारा अपनी जीडीपी का 6% सिर्फ शिक्षा पर खर्च किया जायेगा इससे पहले केंद्र सरकार व राज्य सरकार मिलकर 4 प्रतिशत ही खर्च करते थे।

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